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सिगमंड फ्रायड
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,493 times
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'व्यक्तित्व के मनोविश्लेषणात्मक और संरचनात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) द्वारा प्रतिपादित 'व्यक्तित्व की संरचना' (Structure of Personality) के अंतर्गत 'इदम' (Id), 'अहम' (Ego), और 'पराअहम' (Superego) के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'लिम्बिक सिस्टम' एवं 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' के बीच संघर्ष, तथा कार्ल जुंग (Carl Jung) द्वारा प्रतिपादित 'विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान' (Analytical Psychology) के अंतर्गत 'सामूहिक अचेतन' (Collective Unconscious) और 'आदिप्ररूप' (Archetypes - जैसे 'परसोना' और 'शैडो') के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, रक्षा युक्तियों (Defense Mechanisms) के मनोवैज्ञानिक प्रबंधन और विद्यार्थियों में संतुलित व नैतिक व्यक्तित्व के विकास में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत के अनुसार, 'इदम' (Id) अचेतन मन का वह हिस्सा है जो तात्कालिक संतुष्टि (Pleasure Principle) चाहता है और इसका तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक आधार आवेगों को नियंत्रित करने वाले 'लिम्बिक सिस्टम' से जुड़ा है। वहीं, कार्ल जुंग के 'विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान' में 'सामूहिक अचेतन' (Collective Unconscious) और 'आदिप्ररूप' (Archetypes) उन आनुवंशिक रूप से साझा अनुभवों को दर्शाते हैं जो मानव जाति की विकासवादी विरासत हैं। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में विद्यार्थियों के संवेगात्मक ज्वार, व्यवहारिक समायोजन और नैतिक विकास को समझने के लिए इन सिद्धांतों का गहरा निहितार्थ है।
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