बुद्धि का द्वय शक्ति (Two-factor) का सिद्धांत किसने दिया?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि के द्वय शक्ति या द्विखंड सिद्धांत (Two-factor Theory of Intelligence) का प्रतिपादन प्रसिद्ध ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) द्वारा वर्ष 1904 में किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, मानव बुद्धि मूल रूप से दो कारकों या घटकों से मिलकर बनी होती है: पहला है सामान्य कारक या 'जी-फैक्टर' (General Factor - g) और दूसरा है विशिष्ट कारक या 'एस-फैक्टर' (Specific Factor - s)। 'g' कारक जन्मजात, सार्वभौमिक और मानसिक ऊर्जा का प्रतीक होता है, जो जीवन के सभी प्रकार के बौद्धिक कार्यों में समान रूप से उपयोग किया जाता है। इसके विपरीत, 's' कारक अर्जित, विशेष और भिन्न-भिन्न क्षेत्रों (जैसे संगीत, कला, गणित, या यांत्रिकी) के लिए अलग-अलग होता है, जिसे व्यक्ति अपने परिवेश और प्रशिक्षण के माध्यम से सीखता है और विकसित करता है। स्पीयरमैन का यह सिद्धांत बाल विकास और मनोविज्ञान में बुद्धि की संरचना को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- चार्ल्स स्पीयरमैन ने इस सिद्धांत को सांख्यिकीय पद्धति 'कार्टर विश्लेषण' (Factor Analysis) के आधार पर विकसित किया था।
- विकल्प (b) विलियम स्टर्न ने बुद्धि लब्धि (IQ) की अवधारणा और उसके सूत्र को प्रतिपादित किया था।
- विकल्प (c) अल्फ्रेड बिने को आधुनिक बुद्धि परीक्षण (Intelligence Testing) का जनक माना जाता है, जिन्होंने पहला बुद्धि परीक्षण तैयार किया था।
- विकल्प (d) एडवर्ड थार्नडाइक ने बुद्धि का बहु-कारक सिद्धांत (Multi-factor Theory) और सीखने के मुख्य नियम दिए थे।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल मनोविज्ञान और शैक्षिक आकलन में बुद्धि के विभिन्न स्वरूपों को समझना शिक्षकों के लिए अनिवार्य है। स्पीयरमैन का द्विकारक सिद्धांत छात्रों की सामान्य मानसिक क्षमता और विशिष्ट कौशलों के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। अधिक जानने के लिए पढ़ें बुद्धि के सिद्धांत से जुड़े विस्तृत लेख।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, सुपरटेट) में अक्सर स्पीयरमैन के 'g' और 's' कारकों पर आधारित प्रत्यक्ष या अनुप्रयुक्त (Applied) प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रश्न पत्र हल करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि 'g' फैक्टर को बदला या बढ़ाया नहीं जा सकता क्योंकि यह जन्मजात होता है, जबकि 's' फैक्टर को उचित प्रशिक्षण, अभ्यास और शिक्षण विधियों द्वारा सुधारा जा सकता है। कक्षा शिक्षण के दौरान एक शिक्षक को सभी बच्चों में सामान्य बौद्धिक स्तर को आधार बनाते हुए उनके विशिष्ट कौशलों (s-factor) को पहचानने और प्रोत्साहित करने का अवसर मिलना चाहिए। इस प्रकार के सैद्धांतिक प्रश्न तथ्यात्मक होने के साथ-साथ तार्किक समझ को भी परखते हैं।