तीन खंड (Three-factor) बुद्धि का सिद्धांत किसने दिया?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि के त्र-खंड (Three-Factor Theory) या त्र-तत्व सिद्धांत का प्रतिपादन प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) द्वारा किया गया था। स्पीयरमैन ने मूल रूप से 1904 में बुद्धि का द्व-कारक सिद्धांत (Two-Factor Theory) दिया था, जिसमें सामान्य कारक (G-Factor) और विशिष्ट कारक (S-Factor) शामिल थे। बाद में, अपने सिद्धांत को संशोधित करते हुए उन्होंने इसमें एक तीसरे समूह कारक (Group Factor) या तीसरे तत्व को जोड़ा, जिसे त्र-खंड या त्रि-कारक सिद्धांत के रूप में जाना गया। स्पीयरमैन के अनुसार, प्रत्येक मानसिक गतिविधि में एक सामान्य बुद्धि और कुछ विशिष्ट क्षमताएं शामिल होती हैं, जो व्यक्ति के बौद्धिक प्रदर्शन को निर्धारित करती हैं। अतः विकल्प 'अ' सही उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- चार्ल्स स्पीयरमैन ने कारक विश्लेषण (Factor Analysis) सांख्यिकी तकनीक का उपयोग करके बुद्धि के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया।
- 'G-Factor' (General Factor) जन्मजात और सार्वभौमिक होता है, जबकि 'S-Factor' (Specific Factor) अर्जित और पर्यावरण पर निर्भर करता है।
- विलियम स्टर्न (William Stern) ने मानसिक आयु (Mental Age) का विचार दिया और बुद्धि लब्धि (IQ) का सूत्र विकसित किया।
- अल्फ्रेड बिने (Alfred Binet) को प्रथम बुद्धि परीक्षण (First Intelligence Test - 1905) का जनक माना जाता है।
- थार्नडाइक (Thorndike) ने बहु-खंड सिद्धांत (Multi-factor Theory) का प्रतिपादन किया था।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में बुद्धि के विभिन्न सिद्धांत परीक्षा की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। स्पीयरमैन का यह सिद्धांत संज्ञानात्मक विकास और व्यक्तिगत भिन्नताओं को समझने का आधार प्रदान करता है। अधिक जानकारी के लिए बुद्धि के सिद्धांत लेख को पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:ः
टीईटी (TET) और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में बुद्धि के सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न अक्सर सीधे तथ्यात्मक या उनके प्रणेता के नाम पर आधारित होते हैं। परीक्षार्थियों को स्पीयरमैन के द्व-कारक (Two-factor) और त्र-कारक (Three-factor) सिद्धांतों के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए। जी-फैक्टर (G-factor) को अनुवांशिक और अपरिवर्तनीय माना जाता है, जबकि एस-फैक्टर (S-factor) प्रशिक्षण और अभ्यास के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। कक्षा शिक्षण के दौरान एक शिक्षक को छात्रों की सामान्य बुद्धि और उनकी विशिष्ट योग्यताओं दोनों को पहचानकर तदनुसार शिक्षण रणनीतियों का चयन करना चाहिए ताकि समावेशी कक्षा का वातावरण प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।