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संज्ञानात्मक विकास
Asked 2 महीने पहले · Viewed 1,540 times
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रिचर्ड अल्बर्ट्स और रॉबर्ट सेल्मैन (Robert Selman) के 'सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण करने के सिद्धांत' (Theory of Social Perspective Taking) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आत्म-प्रतिबिंबित या तृतीय-व्यक्ति परिप्रेक्ष्य ग्रहण' (Self-Reflective / Third-Person Perspective Taking)—जिसे उस विकासात्मक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत लगभग 10 से 15 वर्ष की आयु का बालक यह भली-भांति समझने में सक्षम हो जाता है कि न केवल वह दूसरों के दृष्टिकोण को देख सकता है, बल्कि वह एक तटस्थ 'तृतीय-व्यक्ति' या बाहरी प्रेक्षक की स्थिति से स्वयं के और किसी अन्य व्यक्ति के पारस्परिक दृष्टिकोणों को एक साथ एक ही समय पर वस्तुनिष्ठ (Objective) रूप से देख और मूल्यांकित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक संज्ञान, विकेंद्रीकृत तार्किक क्षमता और सहानुभूतिपूर्ण सह-अस्तित्व के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

रॉबर्ट सेल्मैन (Robert Selman) का सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण करने का सिद्धांत (Theory of Social Perspective Taking) बालकों के सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें 'आत्म-प्रतिबिंबित या तृतीय-व्यक्ति परिप्रेक्ष्य ग्रहण' (Self-Reflective / Third-Person Perspective Taking, जो सामान्यतः 10 से 15 वर्ष की आयु में विकसित होता है) वह चरण है जहाँ बालक एक तटस्थ प्रेक्षक के रूप में अपनी और दूसरों की पारस्परिक अंतःक्रियाओं को देख सकता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह क्षमता विद्यार्थियों को साथियों के साथ होने वाले मतभेदों को सुलझाने, सहानुभूति विकसित करने और लोकतांत्रिक संवाद स्थापित करने में सक्षम बनाती है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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