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अल्बर्ट बंडूरा
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,186 times
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक-संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Social-Cognitive Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकनयात्मक अधिगम' (Observational Learning / Modeling) की चार प्रमुख प्रक्रियाओं—(1) अवधान (Attention), (2) धारण (Retention), (3) पुनरुत्पादन (Reproduction), और (4) अभिप्रेरण/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)—तथा उनके द्वारा वर्णित 'स्वयं-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की संकल्पना के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में सकारात्मक रोन-मॉडलिंग (Role Modeling) और विद्यार्थियों के स्वायत्त नियमन (Self-Regulation) के विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक-संज्ञानात्मक सिद्धांत यह रेखांकित करता है कि मनुष्य अपने पर्यावरण के साथ सीधे अनुभव के अलावा दूसरों के व्यवहार (मॉडलिंग) का अवलोकन करके भी सीखते हैं। अवलोकनयात्मक अधिगम चार परस्पर संबंधित चरणों से गुजरता है: अवधान (ध्यान देना), धारण (स्मृति में रखना), पुनरुत्पादन (व्यवहार को दोहराने की शारीरिक और मानसिक क्षमता), और अभिप्रेरण (व्यवहार करने की इच्छा)। इसके अतिरिक्त, 'स्वयं-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) बंडूरा के सिद्धांत का एक केंद्रीय तत्व है, जो किसी विशिष्ट कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने की अपनी क्षमता में व्यक्ति के विश्वास को दर्शाता है। उच्च स्वयं-प्रभावकारिता वाले विद्यार्थी कठिन चुनौतियों से घबराते नहीं हैं, बल्कि अधिक प्रयास करते हैं और असफलताओं से जल्दी उबरते हैं, जो कक्षा-कक्षीय शिक्षण और स्व-नियमन (Self-Regulation) के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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