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अल्बर्ट बंडूरा
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,706 times
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Social Cognitive Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकनयात्मक अधिगम' (Observational Learning / Modeling) की प्रक्रिया के चार प्रमुख घटकों—'अवधान' (Attention), 'धारण' (Retention), 'पुनरुत्पादन' (Reproduction), और 'अभिप्रेरण/पुनर्बलन' (Motivation/Reinforcement)—तथा 'स्व-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की संकल्पना के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-नियमन (Self-Regulation) पर इनके प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

अल्बर्ट बंडूरा का 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (जिसे बाद में 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' कहा गया) इस बात पर जोर देता है कि व्यक्ति दूसरों के व्यवहार का अवलोकन करके (मॉडलिंंग द्वारा) सीखते हैं। इस प्रक्रिया में चार घटक होते हैं: अवधान, धारण, पुनरुत्पादन और अभिप्रेरण। 'स्व-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) बंडूरा के सिद्धांत की एक केंद्रीय अवधारणा है, जिसका तात्पर्य किसी कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने की अपनी क्षमता के बारे में व्यक्ति के अपने विश्वास से है। उच्च स्व-प्रभावकारिता वाले छात्र कठिन चुनौतियों को पार करने में अधिक सक्षम होते हैं और अधिक प्रयास करते हैं, जो कक्षा-कक्ष में आत्म-नियमन (Self-Regulation) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विकल्प 'a' गलत है क्योंकि धारण स्मृति से और पुनरुत्पादन शारीरिक क्रियान्वयन से संबंधित है। विकल्प 'c' और 'd' वैज्ञानिक रूप से मान्य नहीं हैं।
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