वाइगोत्सकी के अनुसार, 'संज्ञानात्मक विकास' में किसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
लेव वाइगोत्सकी (Lev Vygotsky) का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Socio-Cultural Theory) यह प्रतिपादित करता है कि बच्चे का संज्ञानात्मक विकास उसकी सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction) और सांस्कृतिक परिवेश का परिणाम होता है। उनके अनुसार, ज्ञान का निर्माण अकेले नहीं बल्कि समाज के अन्य सदस्यों (जैसे माता-पिता, शिक्षक, वयस्क, और अधिक ज्ञानी साथियों) के साथ अंतःक्रिया के माध्यम से होता है। इसके अलावा, भाषा (Language) को उन्होंने संज्ञानात्मक विकास का सबसे शक्तिशाली उपकरण माना है, क्योंकि शुरुआत में भाषा संवाद का साधन होती है और बाद में यह बालक के आंतरिक विचार (Inner Speech) को निर्देशित करती है। इसलिए, 'सामाजिक अंतःक्रिया और भाषा' वाइगोत्सकी के पूरे सिद्धांत का केंद्रीय आधारस्तंभ है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- सामाजिक अंतःक्रिया: वाइगोत्सकी के अनुसार बच्चे सक्रिय ज्ञान निर्माता हैं जो समाज और संस्कृति से सीखते हैं (पियाजे के जैविक परिपक्वता के विपरीत)।
- भाषा और विचार: वाइगोत्सकी के अनुसार प्रारंभिक वर्षों में भाषा और विचार अलग-अलग होते हैं, बाद में (लगभग 3 वर्ष की आयु में) वे एक-दूसरे से मिल जाते हैं।
- विकल्प विश्लेषण: विकल्प 'अ' (वंशानुक्रम) मुख्य रूप से जीन पियाजे या आनुवंशिक विकास से जुड़ा है; विकल्प 'स' (आहार) और 'द' (खेल) शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं लेकिन वाइगोत्सकी के संज्ञानात्मक सिद्धांत के मुख्य चालक सामाजिक कारक और भाषा हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: लेव वाइगोत्सकी का यह सिद्धांत बाल विकास मनोविज्ञान में 'सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण' के रूप में जाना जाता है, जिसमें वाइगोत्स्की का सिद्धांत (ZPD और स्केफोल्डिंग की अवधारणाओं के साथ) बच्चों के सीखने के सामाजिक संदर्भ को उजागर करता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
टीईटी (CTET/UPTET) और अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में वाइगोत्सकी से संबंधित प्रश्न अक्सर ZPD (Zone of Proximal Development), स्केफोल्डिंग (Scaffolding), और भाषा (Social Speech, Private Speech, Inner Speech) पर आधारित होते हैं। विद्यार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि जहाँ जीन पियाजे ने बच्चे को 'नन्हा वैज्ञानिक' मानकर उसके स्वतंत्र अन्वेषण पर जोर दिया, वहीं वाइगोत्सकी ने बच्चे के विकास में समाज, संस्कृति और भाषा को सर्वोपरि स्थान दिया। कक्षा कक्ष शिक्षण में सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning) और सहपाठियों की मदद (Peer Tutoring) इसी सिद्धांत पर आधारित आधुनिक शिक्षण पद्धतियाँ हैं।