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अल्बर्ट बंडूरा
Asked 4 महीने पहले · Viewed 3,044 times
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सीखने की वह प्रक्रिया जिसमें बच्चा दूसरों के व्यवहार को देखकर सीखता है, क्या कहलाती है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

सीखने की वह प्रक्रिया जिसमें एक बच्चा प्रत्यक्ष रूप से किसी अन्य व्यक्ति या मॉडल के व्यवहार, क्रियाओं और उनके परिणामों को देखकर अनुकरण करता है, उसे प्रेक्षणात्मक अधिगम (Observational Learning) कहा जाता है। इस सिद्धांत के प्रतिपादक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) हैं, जिन्हें उनके 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के लिए जाना जाता है। बंडूरा के अनुसार, बच्चों को सीखने के लिए हमेशा प्रत्यक्ष पुरस्कार या दंड की आवश्यकता नहीं होती; वे अपने सामाजिक परिवेश में दूसरों के व्यवहार का प्रेक्षण करके, उसे अपने संज्ञान में संचित करके और आवश्यकता पड़ने पर पुनरुत्पादित करके बहुत कुछ सीखते हैं। इस अधिगम प्रक्रिया में चार चरण मुख्य रूप से शामिल होते हैं - ध्यान (Attention), धारण (Retention), पुनरुत्पादन (Reproduction), और अभिप्रेरणा या पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)। यह विधि बाल विकास में अनुकरण और मॉडलिंग के महत्व को रेखांकित करती है, जहाँ बच्चे अपने माता-पिता, शिक्षकों और मीडिया आदर्शों के व्यवहार को आत्मसात करते हैं।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • बॉबो डॉल प्रयोग (Bobo Doll Experiment): बंडूरा ने इस प्रसिद्ध प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि बच्चे आक्रामक व्यवहार को भी देखकर सीख सकते हैं।
  • शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning): इवान पावलोव द्वारा प्रतिपादित, जिसमें अस्वाभाविक उद्दीपक को स्वाभाविक उद्दीपक से जोड़कर सीखा जाता है (विकल्प 'ए' गलत है)।
  • प्रयास एवं त्रुटि (Trial and Error): ई.एल. थार्नडाइक का सिद्धांत जो बार-बार की गई गलतियों और सफल प्रयासों पर आधारित है (विकल्प 'सी' गलत है)।
  • क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning): बी.एफ. स्किनर द्वारा प्रतिपादित, जो परिणामों और पुनर्बलन पर आधारित है (विकल्प 'डी' गलत है)।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: प्रेक्षणात्मक अधिगम सामाजिक अधिगम और संज्ञानात्मक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विस्तृत अध्ययन के लिए अल्बर्ट बंडूरा और सामाजिक अधिगम सिद्धांत के मुख्य बिंदुओं को समझना आवश्यक है जो परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔

गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और BPSC) में प्रेक्षणात्मक अधिगम से जुड़े प्रश्न अक्सर व्यावहारिक परिस्थितियों पर आधारित होते हैं। उदाहरण के लिए, कक्षा में शिक्षक का अच्छा आचरण देखकर विद्यार्थियों द्वारा वैसा ही शिष्टाचार अपनाना बंडूरा के मॉडलिंग सिद्धांत का प्रत्यक्ष उदाहरण है। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रेक्षणात्मक अधिगम को 'मॉडलिंग' या 'सामाजिक अधिगम' भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें सामाजिक संदर्भ और संज्ञानात्मक प्रक्रियाएं दोनों एक साथ कार्य करती हैं। ऐसे प्रश्नों को हल करते समय विकल्पों में दिए गए अन्य सिद्धांतों के मूल प्रवर्तकों (जैसे पावलोव, थार्नडाइक और स्किनर) के सिद्धांतों से तुलना करके सही उत्तर आसानी से निकाला जा सकता है।

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