शिक्षण में 'मानक संदर्भित परीक्षण' (Norm-Referenced Test) की तुलना में 'निकष संदर्भित परीक्षण' (Criterion-Referenced Test) का मुख्य अंतर क्या है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया में मूल्यांकन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। 'निकष संदर्भित परीक्षण' (Criterion-Referenced Test - CRT) और 'मानक संदर्भित परीक्षण' (Norm-Referenced Test - NRT) दोनों का उपयोग छात्र के प्रदर्शन को मापने के लिए किया जाता है, परंतु दोनों के उद्देश्यों और मूल्यांकन के मानदंडों में मूलभूत अंतर होता है। निकष संदर्भित परीक्षण वह परीक्षण है जिसमें छात्रों के प्रदर्शन की तुलना किसी पूर्व निर्धारित मानक या अधिगम उद्देश्यों (Predetermined Criteria/Learning Objectives) से की जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि छात्र ने एक निश्चित पाठ्यक्रम या विषय वस्तु को किस सीमा तक सीख लिया है, न कि वह अन्य विद्यार्थियों की तुलना में कहां खड़ा है। इसके विपरीत, मानक संदर्भित परीक्षण छात्रों की आपस में तुलना करता है और उनकी रैंकिंग निर्धारित करता है। अतः विकल्प (b) बिल्कुल सही उत्तर है क्योंकि यह निकष संदर्भित परीक्षण की मूल विशेषता को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- निकष संदर्भित परीक्षण (CRT): यह मास्टर लर्निंग (Mastery Learning) पर आधारित होता है जहाँ पूर्व-निर्दिष्ट मानदंडों को प्राप्त करना मुख्य लक्ष्य होता है (जैसे ड्राइविंग टेस्ट या पात्रता परीक्षाएं)।
- मानक संदर्भित परीक्षण (NRT): यह विद्यार्थियों की सापेक्षिक स्थिति (Relative Standing) को दर्शाता है और कक्षा में उनकी रैंक या प्रतिशत निर्धारित करता है (जैसे प्रतियोगी परीक्षाएं, NEET, JEE)।
- विकल्प (a) मानक संदर्भित परीक्षण (NRT) की विशेषता है, न कि निकष संदर्भित परीक्षण की।
- विकल्प (c) और (d) दोनों ही परीक्षणों के संबंध में भ्रामक और गलत कथन हैं, क्योंकि परीक्षण केवल ग्रेडिंग तक सीमित नहीं होते बल्कि उपचारात्मक शिक्षण में भी सहायता करते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान और मूल्यांकन के क्षेत्र में, ब्लूम के वर्गीकरण (Bloom's Taxonomy) और मापन एवं मूल्यांकन (Measurement and Evaluation) के सिद्धांतों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि अधिगम उद्देश्यों के निर्धारण के लिए समावेशी शिक्षा और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) में निकष संदर्भित परीक्षण अधिक प्रासंगिक होते हैं।
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गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, DSSSB) में मूल्यांकन और आंकलन (Assessment and Evaluation) से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। निकष संदर्भित परीक्षण (CRT) का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि छात्र ने न्यूनतम आवश्यक दक्षताओं (Minimum Competency Levels) को प्राप्त कर लिया है या नहीं। शिक्षक कक्षा कक्ष शिक्षण के दौरान फॉर्मेटिव असेसमेंट में अक्सर निकष आधारित दृष्टिकोण अपनाते हैं ताकि वे समझ सकें कि विद्यार्थियों को किस विशिष्ट क्षेत्र में उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की आवश्यकता है। दूसरी ओर, समेटिव असेसमेंट या चयन परीक्षाओं में NRT का प्रयोग होता है। अध्यापकों को यह समझना आवश्यक है कि CRT छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि व्यक्तिगत महारत पर जोर देता है, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनका समग्र विकास सुनिश्चित होता है।