कथानक बोध परीक्षण विधि के प्रतिपादक कौन हैं?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
कथानक बोध परीक्षण (Thematic Apperception Test - TAT) व्यक्तित्व मापन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण 'प्रक्षेपी विधि' (Projective Technique) है। इस विधि के प्रतिपादक हेनरी मुरे (Henry A. Murray) और क्रिस्टियन डी. मोर्गन (Christiana D. Morgan) हैं, जिन्हें संयुक्त रूप से 'मोर्गन व मुरे' कहा जाता है। इस परीक्षण का निर्माण 1935 में किया गया था। इस विधि में व्यक्ति को विभिन्न अस्पष्ट चित्रों को दिखाकर उनके आधार पर एक कहानी बनाने के लिए कहा जाता है। इन कहानियों के विश्लेषण के माध्यम से व्यक्ति की अचेतन इच्छाओं, कुंठाओं, अंतर्द्वंदों, व्यक्तित्व के छिपे हुए पहलुओं, संवेगों और उसकी मनोवैज्ञानिक समस्याओं का गहन अध्ययन किया जाता है। यह परीक्षण प्रक्षेपण के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें व्यक्ति अपनी आंतरिक भावनाओं और विचारों को बाहरी उद्दीपकों पर आरोपित करता है। इस प्रकार सही विकल्प 'मोर्गन व मुरे' है, क्योंकि अन्य विकल्प जैसे जीन पियाजे संज्ञानात्मक विकास से और पावलाव शास्त्रीय अनुबंधन के सिद्धांत से संबंधित हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- कथानक बोध परीक्षण (TAT) में कुल 31 कार्ड होते हैं (जिसमें 30 चित्रयुक्त और 1 सादा कार्ड होता है)।
- यह परीक्षण 14 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के व्यक्तित्व मापन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
- प्रक्षेपी विधियां व्यक्ति के अचेतन मन (Unconscious Mind) का अध्ययन करने के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं।
- विकल्प b (जीन पियाजे) संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के प्रतिपादक हैं, विकल्प c व d (पावलाव) शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) से जुड़े हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी तकनीकों के अंतर्गत थिमैटिक एपरसेप्शन टेस्ट (TAT) का महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा मनोविज्ञान और बाल विकास में यह विषय अत्यधिक प्रासंगिक है। विस्तृत जानकारी के लिए आप व्यक्तित्व मापन की विधियाँ का अध्ययन कर सकते हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, REET) में व्यक्तित्व मापन से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। प्रक्षेपी (Projective) और अप्रेक्षेपी (Non-Projective) विधियों के बीच अंतर स्पष्ट होना आवश्यक है। TAT परीक्षण में एक समय में एक व्यक्ति पर परीक्षण किया जाता है और प्रत्येक परीक्षणार्थी को कुल 20 कार्ड दिखाए जाते हैं (लिंग और आयु के आधार पर)। अध्यापकों को यह समझना चाहिए कि ऐसे परीक्षण मनोवैज्ञानिकों या प्रशिक्षित सलाहकारों द्वारा ही संचालित किए जाते हैं, न कि सामान्य कक्षा कक्ष में शिक्षकों द्वारा, हालांकि इनकी सैद्धांतिक समझ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को समझने में मदद करती है।