अधिगम के किस सिद्धांत में 'अनुकरण' (Imitation) को सीखने का प्रमुख आधार माना गया है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के प्रतिपादक अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) हैं। इस सिद्धांत के अनुसार, बच्चे प्रत्यक्ष रूप से पुरस्कार या दंड पाने के बजाय अपने सामाजिक परिवेश में मौजूद आदर्शों (Models) का अवलोकन (Observation) करके और उनका अनुकरण (Imitation) करके सीखते हैं। इसे अवलोकनात्मक अधिगम या मॉडलिंग भी कहा जाता है। बंडूरा के अनुसार अधिगम प्रक्रिया में ध्यान (Attention), स्मरण (Retention), पुनरुत्पादन (Reproduction) और अभिप्रेरण (Motivation) चार प्रमुख चरण शामिल होते हैं, जहाँ अनुकरण सीखने की नींव का काम करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- बॉबो डॉल प्रयोग (Bobo Doll Experiment): बंडूरा ने 1961 में इस प्रसिद्ध प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि बच्चे आक्रामक व्यवहार को भी देखकर और उसका अनुकरण करके सीखते हैं।
- विकल्पीय विश्लेषण: शास्त्रीय अनुबंधन (पावलाव) उद्दीपक-अनुक्रिया पर आधारित है; प्रयास एवं त्रुटि (थॉर्नडाइक) बार-बार अभ्यास पर जोर देता है; सूझ-बूझ सिद्धांत (कोहलर) गैस्टाल्टवादियों द्वारा मानसिक सूझ पर केंद्रित है। अत: अनुकरण केवल सामाजिक अधिगम का मुख्य आधार है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत बच्चों के समाजीकरण और व्यवहार विकास को समझने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। अधिक जानकारी के लिए सामाजिक अधिगम सिद्धांत के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET) में बंडूरा के सिद्धांत से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। कक्षा कक्ष शिक्षण में अध्यापकों को एक सकारात्मक मॉडल (Role Model) के रूप में प्रस्तुत होना चाहिए क्योंकि विद्यार्थी शिक्षकों के आचरण, भाषा और नैतिक मूल्यों का अनजाने में अनुकरण करते हैं। अध्यापकों को कक्षा में सहयोगात्मक और सकारात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए जिससे विद्यार्थी अनुकरण के माध्यम से अच्छे सामाजिक और नैतिक गुणों को अपने व्यक्तित्व में आत्मसात कर सकें।