सम्भावना सिद्धांत के प्रतिपादक कौन हैं?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
सम्भावना सिद्धांत या चिन्ह अधिगम सिद्धांत (Sign Theory / Expectancy Theory) के प्रतिपादक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) हैं। टॉलमैन का यह सिद्धांत 'पर्पसिव्ह बिहेवियरिज़्म' (Purposive Behaviorism) या उद्देश्यवादी व्यवहारवाद पर आधारित है। उनके अनुसार, प्राणी का प्रत्येक व्यवहार किसी निश्चित उद्देश्य की ओर निर्देशित होता है। टॉलमैन ने यह सिद्ध किया कि अधिगम केवल उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) का यांत्रिक संबंध नहीं है, बल्कि यह संज्ञानात्मक मानचित्र (Cognitive Map) के विकास पर आधारित होता है, जहाँ शिक्षार्थी पर्यावरण में संकेतों (Signs) के माध्यम से अपनी अपेक्षाओं (Expectancies) का निर्माण करता है। टॉलमैन के चूहों पर किए गए प्रयोगों ने यह दर्शाया कि बिना किसी तात्कालिक पुरस्कार या पुनर्बलन के भी 'अव्यक्त अधिगम' (Latent Learning) संभव है, जो बाद में आवश्यकता पड़ने पर प्रदर्शित होता है। इस प्रकार, यह सिद्धांत व्यवहारवाद और संज्ञानवाद के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- टॉलमैन का सिद्धांत: इसे चिन्ह-गेस्टाल्ट अधिगम सिद्धांत (Sign-Gestalt Learning Theory) भी कहा जाता है।
- विकल्प (b) जेरोम ब्रूनर: इन्होंने 'संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत' तथा 'खोज अधिगम' (Discovery Learning) का प्रतिपादन किया।
- विकल्प (c) एरिक्सन: इन्होंने 'मनोसामाजिक विकास का सिद्धांत' (Psychosocial Development) प्रतिपादित किया, जिसमें जीवन की आठ अवस्थाओं का वर्णन है।
- विकल्प (d) डेविड आसुबेल: इन्होंने 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning) और 'अग्रिम संगठन' (Advance Organizer) प्रतिपादित किया।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में अधिगम के सिद्धांतों का विशेष महत्व है। टॉलमैन का चिन्ह अधिगम सिद्धांत संज्ञानवादी दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम के सिद्धांत और संज्ञानात्मक विकास के लेखों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, REET) में अधिगम के विभिन्न सिद्धांतों के प्रतिपादकों और उनके मुख्य उपनामों पर आधारित प्रश्न बहुतायत से पूछे जाते हैं। टॉलमैन के सिद्धांत से जुड़े मुख्य शब्द जैसे 'कॉग्निटिव मैप', 'लेटेंट लर्निंग' और 'एक्सपेक्टेंसी' हैं। अध्यापकों को कक्षा शिक्षण के दौरान विद्यार्थियों में केवल रटने की प्रवृत्ति के बजाय संज्ञानात्मक मानचित्र विकसित करने पर बल देना चाहिए ताकि वे समस्याओं का तार्किक समाधान खोज सकें। प्रश्न पत्र हल करते समय उद्दीपक-अनुक्रिया आधारित सिद्धांतों (जैसे थॉर्नडाइक, स्किनर) और उद्देश्यवादी/संज्ञानात्मक सिद्धांतों (जैसे टॉलमैन, कोहलर) के बीच का अंतर स्पष्ट होना चाहिए।