सीखने की प्रक्रिया में 'स्मृति' (Memory) का पहला चरण कौन सा है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
सीखने और संज्ञानात्मक विकास की प्रक्रिया में 'स्मृति' (Memory) एक अत्यंत महत्वपूर्ण मानसिक प्रक्रिया है। स्मृति के मुख्य रूप से तीन या चार चरण माने जाते हैं: कूट संकेतन (Encoding), धारण या संचयन (Storage/Retention), और पुनः प्राप्ति (Retrieval) जिसमें पुनःस्मरण (Recall) तथा पहचान (Recognition) शामिल हैं। इनमें से पहला चरण 'कूट संकेतन' (Encoding) है। जब कोई बाहरी सूचना, उद्दीपक या ज्ञान हमारे संवेदी अंगों के माध्यम से मस्तिष्क में प्रवेश करता है, तो मस्तिष्क उसे एक अर्थपूर्ण रूप या कोड में परिवर्तित करता है ताकि उसे मानसिक रूप से संरक्षित किया जा सके। यदि कूट संकेतन ठीक प्रकार से न हो, तो सूचना कभी भी स्थायी स्मृति में संग्रहीत नहीं हो पाती है, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। इसलिए, अधिगम प्रक्रिया में किसी भी नई जानकारी को ग्रहण करने की शुरुआत हमेशा एनकोडिंग या कूट संकेतन से ही होती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- कूट संकेतन (Encoding): यह स्मृति का प्रथम चरण है जहाँ पर्यावरणीय सूचनाओं को मस्तिष्क द्वारा ग्रहण करके कोड या संकेतों में बदला जाता है।
- धारण (Retention/Storage): यह दूसरा चरण है जिसमें कूटबद्ध की गई सूचना को मस्तिष्क में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है।
- पुनः स्मरण (Recall) एवं पहचान (Recognition): ये सूचना की पुनः प्राप्ति (Retrieval) के चरण हैं, जो अंतिम चरणों में आते हैं।
- विकल्प विश्लेषण: 'धारण', 'पुनःस्मरण', और 'पहचान' बाद के चरण हैं, जबकि 'कूट संकेतन' शुरुआत का मूलभूत चरण है। अत: विकल्प (c) पूर्ण रूप से सही उत्तर है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: सूचना प्रक्रमण सिद्धांत (Information Processing Theory) के अनुसार मानव मस्तिष्क एक कंप्यूटर की भाँति कार्य करता है जिसमें सूचना का प्रवेश एनकोडिंग के माध्यम से होता है। अधिक जानने के लिए अधिगम प्रक्रिया और मानसिक प्रक्रियाएं का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (CDP) की परीक्षाओं में स्मृति के चरणों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि कक्षा शिक्षण के दौरान यदि छात्र किसी अवधारणा को ठीक से 'एन्कोड' नहीं कर पा रहे हैं, तो वे भविष्य में उसे 'रिकॉल' भी नहीं कर पाएंगे। इसलिए अध्यापन के समय मल्टीसेंसरी अप्रोच (Multi-sensory approach) का प्रयोग करना चाहिए ताकि बच्चों की इंद्रियां सक्रिय हों और कूट संकेतन मजबूत हो सके। यह प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से वैचारिक स्पष्टता परखने के लिए अति उत्तम है।