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संज्ञानात्मक विकास
Asked 2 महीने पहले · Viewed 1,543 times
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जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'करके सीखना' (Learning by Doing / Experiential Learning)—जिसे उस व्यावहारिक शिक्षाशास्त्रीय उपागम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत विद्यार्थी केवल निष्क्रिय रूप से श्रोता बनकर या पाठ्यपुस्तकों को रटकर ज्ञान प्राप्त नहीं करते, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों, सामूहिक परियोजनाओं, क्षेत्र-कार्यों और समस्याओं के समाधान में सक्रिय रूप से भाग लेकर अपने अनुभवों के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यावहारिक संज्ञान, लोकतांत्रिक सहभागिता और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के पाठ्यक्रम के अनुसार, जॉन डीवी (John Dewey) का 'करके सीखना' (Learning by Doing) प्रगतिशील शिक्षा की नींव है। यह सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि अधिगम एक सक्रिय, अनुभवात्मक और सामाजिक प्रक्रिया है। जब विद्यार्थी व्यावहारिक गतिविधियों, प्रयोगों और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में सक्रिय रूप से संलग्न होते हैं, तो वे निष्क्रिय प्राप्तकर्ता के बजाय ज्ञान के सक्रिय निर्माता (Constructors of Knowledge) बनते हैं। इससे उनकी संज्ञानात्मक संरचना मजबूत होती है, आलोचनात्मक चिंतन विकसित होता है और वे स्वतंत्र रूप से समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होते हैं। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय का सबसे सटीक और वैज्ञानिक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ प्रस्तुत करता है।
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