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संज्ञानात्मक विकास
Asked 2 महीने पहले · Viewed 3,295 times
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एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory or Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map)—जिसे उस आंतरिक मानसिक प्रतिनिधित्व या स्थानिक स्कीमा के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिक्षार्थी केवल बाहरी उद्दीपकों और यांत्रिक प्रतिक्रियाओं (S-R) के आधार पर नहीं, बल्कि अपने पर्यावरण, लक्ष्यों और विभिन्न मार्गों के स्थानिक संबंधों का एक समग्र मानसिक खाका तैयार करके समस्या का समाधान करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लचकीले ज्ञान-सर्जन, अर्थपूर्ण अन्वेषण और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) का 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' या प्रयोजनवादी व्यवहारवाद (Purposive Behaviorism) यह स्पष्ट करता है कि प्राणी (मानव या पशु) केवल यांत्रिक रूप से उद्दीपकों के प्रति अनुक्रिया नहीं करते, बल्कि वे अपने पर्यावरण का एक आंतरिक मानसिक प्रतिनिधित्व यानी 'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map) तैयार करते हैं। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में इस संप्रत्यय का निहितार्थ यह है कि विद्यार्थियों को केवल रटने या यांत्रिक अभ्यास कराने के बजाय उनके भीतर समग्र समझ, स्थानिक या तार्किक संबंधों का अवलोकन और लचीली समस्या-समाधान (Problem Solving) क्षमताओं का विकास किया जाए, ताकि वे बदलती हुई या नई परिस्थितियों में भी अपने आंतरिक मानसिक ढांचे के आधार पर सही निर्णय ले सकें। अतः विकल्प (c) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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