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मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,748 times
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अब्राहम मैस्लो के 'मानवीय आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के संदर्भ में, यदि कोई छात्र अपनी बुनियादी शारीरिक आवश्यकताओं (Physiological needs) और सुरक्षा आवश्यकताओं (Safety needs) के पूर्णतः संतुष्ट न होने के बावजूद, अपनी कक्षाओं में उच्च स्तर की आत्म-सिद्धि (Self-actualization) और बौद्धिक जिज्ञासा का प्रदर्शन करता है, तो मैस्लो के सिद्धांत के बाद के संशोधनों (विशेषकर 'संज्ञानात्मक आवश्यकताओं' और 'सौंदर्यपरक आवश्यकताओं' के समावेश) के आधार पर इस स्थिति का सबसे तार्किक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण क्या होगा?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

अब्राहम मैस्लो के मूल सिद्धांत में आवश्यकताओं को एक कठोर पदानुक्रम में व्यवस्थित किया गया था, जहाँ निचली स्तर की आवश्यकताएँ पूरी होने पर ही ऊपरी स्तर की आवश्यकताएँ जागृत होती हैं। हालांकि, मैस्लो ने अपने बाद के लेखन में यह स्वीकार किया कि कुछ व्यक्तियों के लिए पदानुक्रम का क्रम बदला जा सकता है, और इसमें 'जानने और समझने की इच्छा' (ज्ञानात्मक आवश्यकताएँ) तथा 'समरूपता और सौंदर्य की तलाश' (सौंदर्यपरक आवश्यकताएँ) जैसी प्रवृत्तियाँ पारंपरिक न्यूनता-जनित आवश्यकताओं (Deficiency Needs) के सख्त अनुक्रम का उल्लंघन कर सकती हैं। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।

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