BaalVikas
Menu

पूर्व-पारंपरिक नैतिकता (Pre-conventional Morality) क्या है?

पूर्व-पारंपरिक नैतिकता कोहलबर्ग के नैतिक विकास का पहला स्तर है, जिसमें सही-ग़लत का फ़ैसला दंड से बचने या अपना लाभ पाने के आधार पर होता है। यह ज़्यादातर छोटे बच्चों में दिखता है।

पूर्व-पारंपरिक नैतिकता: विस्तृत व्याख्या

पूर्व-पारंपरिक नैतिकता को समझें

इस स्तर के दो चरण हैं। पहले चरण में बच्चा इसलिए नियम मानता है कि सज़ा न मिले। दूसरे चरण में वह वही करता है जिससे उसे कुछ मिले, यानी लेन-देन की सोच। नियम उसके लिए बाहर से आए हुए आदेश हैं, भीतर के मूल्य नहीं।

याद रखने योग्य बिंदु

  • चरण 1: दंड और आज्ञाकारिता
  • चरण 2: स्वार्थ और लेन-देन
  • नैतिकता बाहरी परिणामों से तय होती है

उदाहरण

बच्चा मिठाई नहीं चुराता, क्योंकि पकड़े जाने पर पिटाई होगी। या वह छोटे भाई को खिलौना देता है, क्योंकि बदले में उससे कुछ मिलेगा।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

दंड से बचना या इनाम पाना कसौटी हो तो पूर्व-पारंपरिक। आयु-सीमा अलग-अलग पुस्तकों में थोड़ी भिन्न मिलती है, इसलिए विकल्पों के अनुसार अपनी पुस्तक की सीमा देखें।

पूर्व-पारंपरिक नैतिकता पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

कोहलबर्ग के सभी प्रश्न देखें →

तुलना पढ़ें

संबंधित अवधारणाएँ

संदर्भ
  • लॉरेंस कोहलबर्ग, Essays on Moral Development, खंड 1 (1981)
  • NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें