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संज्ञानात्मक विकास
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,097 times
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जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम' के दृष्टिकोण के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन की पाँच अवस्थाएँ' (Five Phases of Reflective Thinking) में से एक प्रमुख चरण—'समस्या का बौद्धिकरण या बौद्धिक परिकल्पना निर्माण' (Intellectualization of the Problem into a Hypothesis)—जिसके तहत शिक्षार्थी किसी अचानक उत्पन्न हुई कक्षा-कक्षीय बाधा या भ्रमित करने वाली उलझन को एक स्पष्ट, सुसंगत और परीक्षण योग्य समस्या में रूपांतरित करता है और संभावित समाधानों के रूप में परिकल्पनाएँ गढ़ता है, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक विश्लेषण और स्व-निर्देशित ज्ञान-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

जॉन डीवी के चिंतनशील चिंतन (Reflective Thinking) के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई शिक्षार्थी किसी जटिल या भ्रमित करने वाली स्थिति का सामना करता है, तो वह 'समस्या के बौद्धिकरण' के माध्यम से उस उलझन को एक स्पष्ट वैज्ञानिक समस्या में परिवर्तित करता है। यह प्रक्रिया निष्क्रिय अनुकरण के विपरीत शिक्षार्थी को सक्रिय अन्वेषण, तार्किक विश्लेषण और परिकल्पना (Hypothesis) निर्माण के लिए प्रेरित करती है, जो उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास और समस्या-समाधान की नींव है।
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