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रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम संगठन' (Advance Organizer) की अवधारणा—जिसके तहत किसी नए और जटिल विषय को पढ़ाने से पहले विद्यार्थियों के सामने उच्च-स्तर के, सारांश रूप में और अधिक व्यापक समावेशी परिचयात्मक सामग्रियां प्रस्तुत की जाती हैं, ताकि शिक्षार्थी अपने संज्ञानात्मक ढांचे में पहले से मौजूद प्रासंगिक पूर्व-ज्ञान (Anchor Ideas) के साथ नए ज्ञान को तार्किक रूप से जोड़ सकें—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा के सुदृढ़ीकरण, तार्किक अवबोध और दीर्घकालिक अर्थपूर्ण अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

डेविड औसुबेल का 'अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) इस बात पर बल देता है कि सीखना मुख्य रूप से तब होता है जब नया ज्ञान शिक्षार्थी के मौजूदा संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) से जुड़ता है। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए औसुबेल ने 'अग्रिम संगठन' (Advance Organizers) की अवधारणा दी। ये परिचयात्मक सामग्रियां मुख्य पाठ से पहले उच्च स्तर पर प्रस्तुत की जाती हैं ताकि वे शिक्षार्थी के मन में 'एंकरिंग आइडियाज' (Anchoring Ideas) या वैचारिक आधार का काम करें और नए ज्ञान को तार्किक रूप से समाकलित करके अर्थपूर्ण अधिगम सुनिश्चित कर सकें।
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