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संज्ञानात्मक विकास
Asked 3 महीने पहले · Viewed 4,751 times
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की अवधारणा—जिसके तहत लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक बालक में अमूर्त चिंतन, परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning), वैज्ञानिक सोच और विभिन्न संभावनाओं का एक साथ मानसिक विश्लेषण करने की उच्च-स्तरीय क्षमता विकसित हो जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक मूल्यांकन, स्वतंत्र वैचारिक निर्माण और उन्नत समस्या-समाधान कौशल के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की अंतिम अवस्था 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (11 वर्ष से आगे) अमूर्त चिंतन और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क की शुरुआत का प्रतीक है। इस स्तर पर बालक केवल प्रत्यक्ष रूप से मौजूद वस्तुओं पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि वह मानसिक रूप से विभिन्न संभावनाओं पर विचार कर सकता है, परिकल्पनाएँ बना सकता है और वैज्ञानिक तथा तार्किक तरीकों से उनका परीक्षण कर सकता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह क्षमता विद्यार्थियों को उच्च-स्तरीय समस्याओं के समाधान और स्वतंत्र ज्ञान-निर्माण में मदद करती है।
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