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संवेगात्मक विकास
Asked 3 महीने पहले · Viewed 1,611 times
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जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'असुरक्षित-प्रतिरोधी या उभयभावी संलग्नता' (Insecure-Resistant / Ambivalent Attachment) की अवधारणा—जिसके तहत शिशु प्राथमिक देखभालकर्ता (मां) के अलग होने पर अत्यधिक तीव्र संकट, चिंता और बेचैनी का प्रदर्शन करते हैं, किंतु जब देखभालकर्ता वापस लौटती है, तो वे एक ही समय में उससे लिपटने का प्रयास करने के साथ-साथ अत्यधिक क्रोध, झुंझलाहट और विरोध भी व्यक्त करते हैं (यानी वे आसानी से शांत नहीं होते और उनका व्यवहार अंतर्द्वंद से भरा होता है)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन, भरोसे के संकट और अनुकूلي व्यवहार के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

जॉन बॉल्बी के संलग्नता सिद्धांत के अनुसार, 'असुरक्षित-प्रतिरोधी या उभयभावी संलग्नता' (Insecure-Resistant Attachment) तब विकसित होती है जब प्राथमिक देखभालकर्ता की प्रतिक्रियाएं अत्यधिक असंगत और अप्रत्याशित होती हैं—कभी वे अत्यधिक स्नेही होती हैं और कभी उदासीन। इससे शिशु के मन में निरंतर असुरक्षा और चिंता की भावना घर कर जाती है। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में ऐसे बालकों में संवेगात्मक अस्थिरता, उच्च स्तर की चिंता और शिक्षक या साथियों से अत्यधिक नजदीकी चाहने के बावजूद उन पर पूरा भरोसा न कर पाने का अंतर्द्वंद दिखाई देता है, जिससे उनका शैक्षणिक अन्वेषण प्रभावित होता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक वैज्ञानिक और प्रामाणिक कथन है।
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