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मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद
Asked 3 महीने पहले · Viewed 3,621 times
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation) अथवा 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत सर्वोच्च स्तर पर प्रतिपादित 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता का दोहन करने, सृजनात्मक होने, व्यक्तिगत विकास प्राप्त करने और अपनी आंतरिक संभावनाओं को पूर्ण रूप से साकार करने के लिए प्रेरित होता है (जो कि शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान की निम्न-स्तरीय आवश्यकताओं के संतोष के उपरांत ही सक्रिय होती है)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, आंतरिक आकांक्षाओं, और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के पाठ्यक्रम के अनुसार, अब्राहम मास्लो का 'आवश्यकताओं का पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) मानवतावादी मनोविज्ञान का एक आधारभूत स्तंभ है। मास्लो के अनुसार, मनुष्य की आवश्यकताएँ एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित होती हैं—शारीरिक आवश्यकताएँ (Physiological), सुरक्षा (Safety), अपनेपन और प्रेम (Belongingness), आत्म-सम्मान (Esteem), और अंततः सर्वोच्च स्तर पर 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization)। विकल्प (c) वैज्ञानिक दृष्टि से सबसे अधिक प्रामाणिक है क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि जब तक विद्यार्थियों की बुनियादी, संवेगात्मक और सुरक्षात्मक आवश्यकताएँ पूरी नहीं होतीं, तब तक वे अपनी सर्वोच्च सृजनात्मक और संज्ञानात्मक क्षमताओं (आत्म-सिद्धि) का उपयोग करने के लिए प्रेरित नहीं हो सकते। कक्षा में एक सुरक्षित, सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण प्रदान करके शिक्षक इस प्रक्रिया को सुगम बना सकता है।
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