अभिप्रेरणा का 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) किसने दिया था?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अभिप्रेरणा का 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) प्रसिद्ध मानवतावादी मनोवैज्ञानिक अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा 1943 में अपनी पुस्तक 'ए थ्योरी ऑफ़ ह्यूमन मोटिवेशन' में प्रतिपादित किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, मानव आवश्यकताएँ एक निश्चित क्रम या पदानुक्रम में व्यवस्थित होती हैं, जो नीचे से ऊपर की ओर चलती हैं। सबसे पहले बुनियादी शारीरिक आवश्यकताएँ (जैसे भोजन, पानी, नींद) पूरी होती हैं, उसके बाद सुरक्षा, सामाजिक संबंध, सम्मान और अंत में सर्वोच्च स्तर पर 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) की आवश्यकता आती है। मैस्लो के अनुसार, जब तक निचले स्तर की आवश्यकताएँ संतोषजनक रूप से पूरी नहीं होतीं, तब तक व्यक्ति उच्च स्तर की आवश्यकताओं की ओर प्रेरित नहीं होता है। यही कारण है कि कक्षा शिक्षण में विद्यार्थियों की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे पहले आवश्यक माना जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- मैस्लो के पदानुक्रम में कुल पाँच स्तर होते हैं: शारीरिक आवश्यकताएँ, सुरक्षा आवश्यकताएँ, अपनेपन/प्रेम की आवश्यकताएँ, सम्मान की आवश्यकताएँ, और आत्म-सिद्धि।
- विकल्प (b) हर्ज़बर्ग ने द्वि-कारक सिद्धांत (Two-Factor Theory) दिया था जो कार्यस्थल की प्रेरणा से संबंधित है।
- विकल्प (c) स्किनर ने क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) का सिद्धांत दिया था।
- विकल्प (d) सिगमंड फ्रायड ने मनोविश्लेषणवाद (Psychoanalysis) का प्रतिपादन किया था।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में मैस्लो का सिद्धांत छात्रों की आंतरिक प्रेरणा और सीखने की क्षमता को समझने के लिए केंद्रीय है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम और अभिप्रेरणा के सिद्धांतों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS) में प्रेरणा के सिद्धांतों से हर वर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। मैस्लो के पदानुक्रम से जुड़े प्रश्नों में अक्सर क्रम पूछ लिया जाता है या यह पूछा जाता है कि कौन सी आवश्यकता सर्वोच्च स्तर की है। 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर लेता है। शिक्षकों को यह समझना चाहिए कि भूखा या डरा हुआ बच्चा कक्षा में सीखने पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकता, क्योंकि उसके निचले स्तर के पायदान अभी रिक्त हैं। इस प्रकार यह सिद्धांत समावेशी और बाल-केन्द्रित शिक्षा प्रणाली की नींव रखता है।