कक्षा में 'सृजनात्मकता' (Creativity) को बढ़ावा देने के लिए कौन सा चिंतन आवश्यक है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
कक्षा में 'सृजनात्मकता' (Creativity) को बढ़ावा देने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानसिक प्रक्रिया 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) है। गिलफोर्ड (Guilford) के बुद्धिमत्ता के मॉडल के अनुसार, अपसारी चिंतन वह प्रक्रिया है जिसमें एक ही समस्या के समाधान के लिए कई अलग-अलग और नए दृष्टिकोणों से विचार किया जाता है। इसे 'lateral thinking' या बहु-दिशात्मक सोच भी कहते हैं। सृजनात्मक बालकों में मौलिकता (Originality), लचीलापन (Flexibility) और प्रवाह (Fluency) जैसे गुण पाए जाते हैं, जो केवल अपसारी चिंतन के माध्यम से ही विकसित और पोषित हो सकते हैं। इसलिए शिक्षक को कक्षा में ऐसे खुले अंत वाले प्रश्न (Open-ended questions) पूछने चाहिए जो छात्रों को लीक से हटकर सोचने के लिए प्रेरित करें।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- अपसारी चिंतन (Divergent Thinking): यह सृजनात्मकता का आधार है, जिसमें एक समस्या के अनेक संभावित समाधान खोजे जाते हैं।
- अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking): यह पारंपरिक और बंद अंत वाले प्रश्नों से जुड़ा होता है जहाँ केवल एक सही उत्तर पर पहुँचा जाता है (जैसे बहुविकल्पीय प्रश्न), जो सृजनात्मकता को सीमित करता है।
- अन्य विकल्प विश्लेषण: तार्किक चिंतन गणितीय और अनुक्रमिक समस्याओं के लिए सही है, जबकि स्मृति-आधारित चिंतन रटने पर जोर देता है जो रचनात्मकता के विपरीत है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं मनोविज्ञान में सृजनात्मकता का प्रत्यय जे.पी. गिलफोर्ड द्वारा प्रतिपादित बुद्धि की संरचना (Structure of Intellect) सिद्धांत से गहराई से जुड़ा है। अधिक जानने के लिए पढ़ें सृजनात्मकता एवं बाल विकास का विस्तृत मनोवैज्ञानिक विश्लेषण।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET और State TET) में सृजनात्मकता से संबंधित प्रश्न अक्सर व्यावहारिक परिस्थितियों पर आधारित होते हैं। यदि कोई शिक्षक छात्रों को किसी पुरानी समस्या का नया समाधान खोजने के लिए कहता है, तो वह अपसारी चिंतन को बढ़ावा दे रहा है। इसके विपरीत, यदि पाठ्यक्रम केवल तथ्यों को याद रखने और परीक्षा में सही विकल्प चुनने तक सीमित है, तो वह अभिसारी चिंतन को बढ़ावा दे रहा है। बाल-केन्द्रित शिक्षा (Child-centric Education) में हमेशा अपसारी चिंतन को प्राथमिकता दी जाती है ताकि बच्चों की मौलिक प्रतिभा और कल्पना शक्ति का अधिकतम विकास हो सके।