वाइगोत्सकी के अनुसार, 'निजी वाक' (Private Speech) किस प्रकार अधिगम को प्रभावित करता है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Socio-Cultural Theory) के अनुसार, 'निजी वाक' (Private Speech) वह अवस्था है जब बच्चे अपने कार्यों को निर्देशित, विनियमित और नियंत्रित करने के लिए जोर-जोर से खुद से बातें करते हैं। जीन पियाजे इसे 'अहंकेन्द्रित वाक' (Egocentric Speech) मानते थे जो संज्ञानात्मक अपरिपक्वता का प्रतीक है, लेकिन वाइगोत्स्की का मानना था कि निजी वाक बच्चों के संज्ञानात्मक विकास, भाषा और विचार के मिलन तथा स्वनियमन (Self-Regulation) का एक शक्तिशाली साधन है। समय के साथ यह बाहरी वाणी आंतरिक वाणी (Inner Speech) में बदल जाती है। अत: विकल्प (b) इस बात की पुष्टि करता है कि यह बालक को अपने कार्यों को स्व-निर्देशित करने में मदद करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- वाइगोत्स्की के अनुसार भाषा और चिंतन पहले स्वतंत्र होते हैं और बाद में (लगभग 2 वर्ष की आयु के बाद) आपस में मिल जाते हैं।
- निजी वाक बच्चों में समस्या-समाधान (Problem Solving) की क्षमता को बढ़ाता है और उन्हें कठिन कार्यों के दौरान एकाग्र रहने में सहायता करता है।
- विकल्प (a), (c) और (d) पियाजे की शुरुआती सोच या व्यवहारवादी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जो वाइगोत्स्की के रचनात्मक और सामाजिक दृष्टिकोण के विरुद्ध हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: वाइगोत्स्की के अनुसार सामाजिक अंतःक्रिया, संस्कृति और भाषा अधिगम के तीन मुख्य स्तंभ हैं। अधिक जानने के लिए पढ़ें वाइगोत्स्की का सिद्धांत एवं उनके संज्ञानात्मक विकास के चरण।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटीईटी (CTET) और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में पियाजे और वाइगोत्स्की के भाषा संबंधी विचारों में अंतर पर बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। पियाजे ने बच्चों द्वारा खुद से बात करने को 'अहंकेन्द्रित' मानकर इसे नकारात्मक रूप में देखा, जबकि वाइगोत्स्की ने इसे 'निजी वाक' कहकर बच्चों के मानसिक विकास का आवश्यक और सकारात्मक चरण बताया। एक शिक्षक के रूप में कक्षा में बच्चों को अपने विचारों को व्यक्त करने और कार्य करते समय खुद से संवाद करने की स्वतंत्रता देनी चाहिए क्योंकि यह उनकी स्वतंत्रता और आत्म-नियामक क्षमताओं (Self-Regulatory Skills) को मजबूत करता है।