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अभिप्रेरणा एवं प्रेरक
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शिक्षण में 'अभिप्रेरणा' (Motivation) का महत्व क्या है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में 'अभिप्रेरणा' (Motivation) एक केंद्रीय और अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है। यह वह आंतरिक या बाह्य बल है जो छात्र को किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सक्रिय करता है, उसका मार्गदर्शन करता है और उसके व्यवहार को बनाए रखता है। शिक्षण में अभिप्रेरणा का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर सीखने की स्वाभाविक जिज्ञासा और रुचि को जागृत करना है। जब विद्यार्थी आंतरिक रूप से अभिप्रेरित होते हैं, वे पाठ्यवस्तु को केवल रटने के बजाय गहराई से समझते हैं, जिससे उनका संज्ञानात्मक और समग्र विकास सुगम होता है। अतः विकल्प 'b' सही उत्तर है क्योंकि यह शिक्षार्थी की आंतरिक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • अभिप्रेरणा दो प्रकार की होती है - आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation) और बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic Motivation)।
  • आंतरिक अभिप्रेरणा सीखने के स्थायी और सार्थक परिणामों से जुड़ी होती है।
  • विकल्प 'a' (कठोर अनुशासन) बाल-केंद्रित शिक्षा के विरुद्ध है; आधुनिक शिक्षा में भय या कठोरता का कोई स्थान नहीं है।
  • विकल्प 'c' और 'd' (पाठ्यक्रम छोटा करना या शिक्षक का काम कम करना) शिक्षण की गुणवत्ता या उद्देश्यों से संबंधित नहीं हैं, बल्कि ये कुप्रबंधन को दर्शाते हैं।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में मोटिवेशन का सिद्धांत मैस्लो की आवश्यकता पदानुक्रम (Maslow's Hierarchy of Needs) और स्किनर के अधिगम सिद्धांतों से जुड़ा है। यह अधिगम के सिद्धांत और समावेशी शिक्षा के अंतर्गत एक अनिवार्य आधारशिला है जो हर छात्र की वैयक्तिक भिन्नताओं को ध्यान में रखकर सिखाई जाने वाली प्रविधियों को प्रभावित करती है।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔

गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

सीटेट (CTET) और अन्य राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) खंड के अंतर्गत अभिप्रेरणा से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। शिक्षकों को कक्षा कक्ष में ऐसी शिक्षण विधियों का प्रयोग करना चाहिए जो रटन विद्या को हतोत्साहित करें और छात्रों में जिज्ञासा पैदा करें। जब एक शिक्षक प्रशंसा, पुरस्कार, रचनात्मक प्रतिक्रिया और वास्तविक जीवन के उदाहरणों का उपयोग करता है, तो छात्र कक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। प्रश्न में दिए गए विकृत विकल्प जैसे कठोर अनुशासन या काम कम करना, शिक्षक-केंद्रित या सत्तावादी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जिन्हें एनसीएफ-2005 (NCF 2005) पूरी तरह से खारिज करता है। अतः सही विकल्प चुनते समय बाल-केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दें।

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