निम्नलिखित में से कौन पितृसत्ता की विशेषता नहीं है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
पितृसत्ता (Patriarchy) एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जिसमें पुरुषों को महिलाओं की तुलना में अधिक शक्ति, अधिकार और प्रधानता प्राप्त होती है। इस व्यवस्था के तहत, समाज की धुरी पुरुष होते हैं और परिवार तथा समाज से जुड़े सभी प्रमुख निर्णय पुरुषों द्वारा ही लिए जाते हैं। पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं को अक्सर शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर, आश्रित और घरेलू भूमिकाओं तक सीमित माना जाता है, जबकि पुरुषों को प्रभुत्वशाली (dominant) और बाहरी गतिविधियों का संचालक माना जाता है। इसके विपरीत, विकल्प (c) में दिया गया कथन 'विरासत केवल महिलाओं के लिए है' पितृसत्ता की विशेषता नहीं है, बल्कि यह मातृसत्ता (Matriarchy) या मातृवंशीय (Matrilineal) समाज की विशेषता है, जहां वंश और संपत्ति का अधिकार महिलाओं या माताओं के माध्यम से अगली पीढ़ी को हस्तांतरित होता है। इसलिए, प्रश्न के अनुसार गलत कथन या गैर-विशेषता होने के नाते विकल्प (c) पूर्ण रूप से सही उत्तर है। बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत लैंगिक संवेदनशीलता (Gender Sensitivity) और लैंगिक रूढ़िवादिता (Gender Stereotyping) को पढ़ाते समय इन सामाजिक संरचनाओं की समझ बहुत महत्वपूर्ण होती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- पितृसत्तात्मक व्यवस्था में पुरुष प्रभुत्व (Male dominance) और पितृवंशीय (Patrilineal) उत्तराधिकार प्रणाली पाई जाती है।
- विकल्प (a), (b) और (d) पितृसत्ता के मूल स्तंभों को दर्शाते हैं जहां निर्णय लेने की शक्ति और श्रेष्ठता पुरुषों के पास होती है।
- मातृसत्तात्मक समाजों (जैसे मेघालय की खासी जनजाति) में संपत्ति और विरासत महिलाओं के नाम पर होती है, जो पितृसत्ता के बिल्कुल विपरीत है।
- शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में लैंगिक असमानता, सामाजिक समावेशन और बाल समाजीकरण से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: समाजशास्त्र और बाल विकास के दृष्टिकोण से, परिवार और समाज बच्चों के लिंग आधारित समाजीकरण (Gender Socialization) में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसे गहराई से समझने के लिए पढ़ें समावेशी शिक्षा और लैंगिक मुद्दे।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटेट (CTET) और अन्य राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में बाल विकास के अंतर्गत 'लिंग एक सामाजिक निर्माण है' (Gender as a social construct) इस अवधारणा पर विशेष बल दिया जाता है। पितृसत्तात्मक मूल्य बच्चों के मन में बाल्यावस्था से ही घर कर जाते हैं जब उन्हें खिलौनों, कपड़ों और कार्यों के आधार पर विभाजित किया जाता है। एक शिक्षक के रूप में आपकी यह जिम्मेदारी होती है कि कक्षा-कक्ष में लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा दें और किसी भी प्रकार की रूढ़िवादिता को दरकिनार करें। इस प्रश्न में यह परखने की कोशिश की गई है कि क्या अभ्यर्थी पितृसत्ता और मातृसत्ता के बुनियादी अंतर को स्पष्ट रूप से समझ पा रहा है या नहीं। विरासत का महिलाओं के पास होना मातृसत्तात्मक व्यवस्था की निशानी है, न कि पितृसत्ता की।