निम्नलिखित में से शिक्षा में ICT कार्यान्वयन का मुख्य लक्ष्य नहीं है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
शिक्षा में आईसीटी (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी - ICT) के कार्यान्वयन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के संज्ञानात्मक विकास, सूचना प्रसंस्करण कौशल (information processing skills), और एक गतिशील शिक्षण वातावरण का निर्माण करना है। प्रौद्योगिकी का उपयोग शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को सुगम बनाने, छात्रों को डिजिटल साक्षर बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर ज्ञान निर्माता के रूप में विकसित करने के लिए किया जाता है। विकल्प 'a' में छात्रों को 'टेक्नो-एडिक्ट' (techno-addict यानी प्रौद्योगिकी का आदी) बनाने की बात कही गई है, जो बाल विकास और आधुनिक शिक्षाशास्त्र के बिल्कुल विपरीत है। शिक्षा कभी भी किसी भी माध्यम या उपकरण की लत को बढ़ावा नहीं देती है, बल्कि उसके विवेकपूर्ण और रचनात्मक उपयोग पर जोर देती है। इसलिए, 'a' विकल्प सही उत्तर है क्योंकि यह आईसीटी का लक्ष्य नहीं बल्कि एक नकारात्मक परिणाम है जिसे शिक्षा कभी प्रोत्साहित नहीं करती।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- आईसीटी (ICT) का प्राथमिक उद्देश्य छात्रों की आलोचनात्मक सोच (critical thinking) और समस्या समाधान क्षमताओं को मजबूत करना है।
- यह छात्रों को केवल निष्क्रिय श्रोता के रूप में नहीं बल्कि सक्रिय ज्ञान निर्माता (active knowledge constructors) के रूप में स्थापित करता है।
- विकल्प b, c और d सभी सकारात्मक शैक्षणिक लक्ष्य हैं जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और आधुनिक पाठ्यक्रम रूपरेखा (NCF) के अनुकूल हैं।
- विकल्प a 'टेक्नो-एडिक्ट' जैसे नकारात्मक शब्द का उपयोग करता है, जो शिक्षा के समग्र विकास के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: आधुनिक शिक्षाशास्त्र और शैक्षणिक प्रौद्योगिकी में, प्रौद्योगिकी का एकीकरण छात्रों के संज्ञानात्मक ढांचे को विस्तृत करने के लिए किया जाता है, न कि उन्हें किसी प्रकार की लत या निर्भरता में डालने के लिए। अधिक जानने के लिए पढ़ें शैक्षणिक नवाचार और आईसीटी का विस्तृत संदर्भ।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्णविस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) परीक्षाओं में इस प्रकार के नकारात्मक प्रश्न (NOT वाले प्रश्न) अक्सर उम्मीदवारों को भ्रमित करने के लिए पूछे जाते हैं। ऐसे प्रश्नों को हल करते समय बाल मनोविज्ञान के मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण, स्वायत्तता, और नैतिक मूल्यों का विकास करना होता है। 'टेक्नो-एडिक्ट' शब्द एक व्यामोह या व्यसन को दर्शाता है, जिसे मनोवैज्ञानिक रूप से हानिकारक माना जाता है। इसलिए, विकल्पों का चयन करते समय सकारात्मक और नकारात्मक शब्दों की पहचान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षण में कंप्यूटर और इंटरनेट का प्रयोग केवल एक साधन (tool) के रूप में होना चाहिए, साध्य (goal) के रूप में नहीं।