भाषा विकास के लिए संवेदनशील अवधि है:
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
भाषा विकास के लिए 'संवेदनशील अवधि' (Sensitive Period) प्रारंभिक बाल्यावस्था (Early Childhood) को माना जाता है। इस चरण में बच्चों का मस्तिष्क पर्यावरण से भाषा सीखने के लिए अत्यधिक ग्रहणशील होता है। मनोवैज्ञानिकों, विशेषकर नोआम चोमस्की और मारिया मोंटेसरी के अनुसार, बच्चों में भाषा अर्जन यंत्र (LAD) जन्मजात होता है, जो बाल्यावस्था के वर्षों में सबसे अधिक सक्रिय रूप से कार्य करता है। यदि इस अवधि में बच्चे को समृद्ध भाषाई परिवेश न मिले, तो उसके भाषा कौशल के विकास में स्थायी बाधा उत्पन्न हो सकती है। अत: बाल्यावस्था भाषा शिक्षण और व्याकरण के आंतरिककरण का स्वर्णिम काल है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- प्रारंभिक बाल्यावस्था (Early Childhood) में शब्दावली का विकास तीव्र गति से होता है।
- चोमस्की के अनुसार 0 से 5-6 वर्ष की आयु भाषा अर्जन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है।
- अन्य विकल्प जैसे वयस्कता, किशोरावस्था या केवल 10-15 वर्ष की आयु भाषा के प्राथमिक विकास के लिए संवेदनशील अवधि नहीं हैं, क्योंकि उस समय तक मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी कम होने लगती है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास में संवेदनशील अवधि का प्रत्यय विकासात्मक मनोविज्ञान की आधारशिला है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें जीन पियाजे का सिद्धांत और भाषा विकास से जुड़े अन्य आयाम।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटीईटी (CTET) और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में भाषा विकास से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। यह समझना आवश्यक है कि संवेदनशील अवधि वह समय है जब बच्चा बिना किसी औपचारिक शिक्षण के सहज रूप से अपनी मातृभाषा सीख लेता है। बाल्यावस्था में खेल-खेल में भाषा सीखना, कहानी सुनना और संवाद करना बच्चों के संज्ञानात्मक और भाषाई विकास को सुदृढ़ बनाता है। शिक्षकों को प्राथमिक कक्षाओं में ऐसा समावेशी और संवादात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए जहाँ बच्चों को अपनी भाषा खुलकर व्यक्त करने के भरपूर अवसर मिल सकें।