भाषा विकास का सिद्धांत (Language Development) किसने दिया?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
भाषा विकास का सिद्धांत प्रसिद्ध भाषाविद् और मनोवैज्ञानिक नोआम चोमस्की (Noam Chomsky) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। चोमस्की के अनुसार, बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता होती है। उन्होंने यह तर्क दिया कि मानव मस्तिष्क में एक अंतर्निहित जैविक संरचना होती है जिसे भाषा अर्जन उपकरण (Language Acquisition Device - LAD) कहा जाता है। इस सिद्धांत के तहत, 'सार्वभौमिक व्याकरण' (Universal Grammar) की अवधारणा भी महत्वपूर्ण है, जिसका अर्थ है कि सभी मानव भाषाओं में कुछ अंतर्निहित व्याकरणिक नियम समान होते हैं, जो बच्चों को बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के अपनी मातृभाषा को तेजी से और स्वाभाविक रूप से सीखने में सक्षम बनाते हैं। उनका यह दृष्टिकोण व्यवहारवादी दृष्टिकोण के विपरीत था, क्योंकि वह मानते थे कि भाषा केवल अनुकरण या पुनर्बलन से नहीं सीखी जाती, बल्कि यह बालक की आंतरिक मानसिक योग्यताओं का परिणाम है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- नोआम चोमस्की: इन्हें आधुनिक भाषा विज्ञान का जनक कहा जाता है और इनका भाषा विकास सिद्धांत संज्ञानात्मक और जैविक विकास से जुड़ा है।
- LAD (Language Acquisition Device): यह चोमस्की द्वारा दी गई वह जन्मजात क्षमता है जो बच्चों को भाषा के नियमों को पहचानने में मदद करती है।
- विकल्प विश्लेषण (स्पीयरमैन): चार्ल्स स्पीयरमैन ने बुद्धि का द्विकारक सिद्धांत (Two-Factor Theory of Intelligence) दिया था।
- विकल्प विश्लेषण (विलियम स्टर्न): विलियम स्टर्न ने सर्वप्रथम 'मानसिक आयु' (Mental Age) शब्द का सुझाव दिया था और बुद्धि लब्धि (IQ) का सूत्र विकसित किया था।
- विकल्प विश्लेषण (क्लार्क हल): क्लार्क हल ने पुनर्बलन का सिद्धांत या ड्राइव रिडक्शन थ्योरी (Drive Reduction Theory of Learning) प्रतिपादित की थी।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास और शिक्षाशास्त्र में भाषा और विचार (Language and Thought) का अध्ययन पियाजे, वाइगोत्स्की और चोमस्की के सिद्धांतों के बिना अधूरा है। चोमस्की का यह जैविक सिद्धांत परीक्षाओं में बहुधा पूछा जाता है। अधिक जानकारी के लिए देखें वाइगोत्स्की का सिद्धांत या जीन पियाजे का सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, REET) में चोमस्की के भाषा विकास सिद्धांत से संबंधित प्रश्न लगभग हर वर्ष पूछे जाते हैं। प्रश्नों का पैटर्न मुख्य रूप से 'LAD', 'जन्मजात क्षमता', और 'सार्वभौमिक व्याकरण' शब्दों पर आधारित होता है। शिक्षकों के लिए यह समझना आवश्यक है कि जब कोई बच्चा अपने परिवेश से भाषा ग्रहण करता है, तो उसकी आंतरिक जैविक संरचना किस प्रकार कार्य करती है। इस वैचारिक स्पष्टता से छात्र pedagogy आधारित प्रश्नों को आसानी से हल कर सकते हैं और शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर सकते हैं।