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लेव वाइगोत्स्की
Asked 3 महीने पहले · Viewed 4,665 times
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निम्नलिखित में से किसने स्नेह सिद्धान्त दिया?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प 'अ' (जॉन बॉल्बी) है। जॉन बॉल्बी (John Bowlby) ने बाल मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण के क्षेत्र में 'स्नेह सिद्धांत' या 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) का प्रतिपादन किया। उनके अनुसार, शिशु जन्मजात रूप से अपनी प्राथमिक देखभाल करने वाले (मुख्यतः माता) के साथ एक विशेष भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक जुड़ाव या संलग्नता विकसित करने की प्रवृत्ति के साथ पैदा होते हैं। यह संलग्नता बच्चों के जीवित रहने, उनकी सुरक्षा की भावना और उनके समग्र सामाजिक-संवेगात्मक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आधार का कार्य करती है। बॉल्बी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित संलग्नता वाले बच्चे भविष्य में अधिक आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सामाजिक रूप से सक्षम बनते हैं, जबकि असुरक्षित संलग्नता उनके मानसिक स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • जॉन बॉल्बी का संलग्नता सिद्धांत: यह बच्चों और देखभालकर्ताओं के बीच मजबूत भावनात्मक बंधनों को स्पष्ट करता है।
  • विकल्प 'ब' (हार्वर्ड गार्डनर): इन्होंने बहुबुद्धि सिद्धांत (Theory of Multiple Intelligences) दिया है, जिसमें विभिन्न प्रकार की क्षमताओं का वर्णन है।
  • विकल्प 'स' (स्किनर): इन्होंने क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) का प्रसिद्ध सिद्धांत प्रतिपादित किया।
  • विकल्प 'द' (वाइगोत्स्की): इन्होंने सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का सिद्धांत (Socio-cultural Theory of Development) दिया।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जॉन बॉल्बी का संलग्नता सिद्धांत बाल विकास और शिक्षा मनोविज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो शिशुओं के संवेगात्मक विकास को समझने में मदद करता है। अधिक जानकारी के लिए बाल विकास मनोविज्ञान और समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों का अध्ययन करें।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔

गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और BPSC TRE) में मनोवैज्ञानिकों और उनके सिद्धांतों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। जॉन बॉल्बी के संलग्नता सिद्धांत से जुड़े प्रश्नों में बच्चों के संवेगात्मक व्यवहार, अलगाव की चिंता (Separation Anxiety) और सुरक्षित बनाम असुरक्षित संलग्नता के प्रकारों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कक्षा कक्ष के वातावरण में एक शिक्षक को यह समझना आवश्यक है कि जिन बच्चों में सुरक्षित संलग्नता का अभाव होता है, उन्हें अधिक संवेगात्मक समर्थन और सुरक्षित माहौल की आवश्यकता होती है ताकि वे कक्षा में प्रभावी रूप से अधिगम कर सकें। परीक्षा में सीधे सिद्धांतकार का नाम या उनके द्वारा दी गई अवधारणाओं की विशेषताओं से जुड़े प्रश्न बहुतायत में आते हैं, इसलिए प्रमुख सिद्धांतों की सूची तैयार रखना अत्यंत लाभदायक साबित होता है।

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