माँग-पूर्ति (आवश्यकता पदानुक्रम) का सिद्धांत किसने दिया?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
माँग-पूर्ति या आवश्यकता पदानुक्रम का सिद्धांत (Hierarchy of Needs Theory) प्रसिद्ध मानवतावादी मनोवैज्ञानिक अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, मानव प्रेरणा (Human Motivation) कुछ निश्चित आवश्यकताओं पर आधारित होती है जो एक पदानुक्रमित क्रम में व्यवस्थित होती हैं। मैस्लो के अनुसार, जब तक व्यक्ति की निम्न स्तर की आवश्यकताएँ (जैसे- शारीरिक आवश्यकताएँ और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएँ) पूरी नहीं होतीं, तब तक वह उच्च स्तर की आवश्यकताओं (जैसे- आत्म-यथार्थलीकरण या Self-Actualization) की ओर अग्रसर नहीं हो सकता। यह सिद्धांत शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों की प्रेरणा और भावनात्मक कल्याण को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- मैस्लो के पदानुक्रम में पाँच चरण होते हैं: 1. शारीरिक आवश्यकताएँ (Physiological Needs), 2. सुरक्षा आवश्यकताएँ (Safety Needs), 3. अपनेपन और प्रेम की आवश्यकताएँ (Belongingness and Love Needs), 4. सम्मान आवश्यकताएँ (Esteem Needs), और 5. आत्म-यथार्थलीकरण (Self-Actualization)।
- इवान पेट्रोविच पावलाव ने 'शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धांत' (Classical Conditioning) दिया था, जो सीखने की प्रक्रिया से संबंधित है।
- जीन पियाजे ने 'संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) प्रतिपादित किया था जो बच्चों के मानसिक विकास की अवस्थाओं की व्याख्या करता है।
- विकल्प b और d दोनों एक ही मनोवैज्ञानिक पावलाव को संदर्भित करते हैं, जो इस प्रश्न का सही उत्तर नहीं हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: मानवतावादी मनोविज्ञान में अब्राहम मैस्लो का योगदान अद्वितीय है। शिक्षा मनोविज्ञान में यह सिद्धांत विद्यार्थियों की मूल आवश्यकताओं को संतुष्ट करने पर बल देता है ताकि उनका संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास सुचारू रूप से हो सके। अधिक जानकारी के लिए देखें समावेशी शिक्षा और प्रेरणा के सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में मैस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। परीक्षा में यह पूछा जा सकता है कि सर्वोच्च आवश्यकता कौन सी है (आत्म-यथार्थलीकरण) या मूलभूत आवश्यकता कौन सी है (शारीरिक आवश्यकताएँ)। कक्षा कक्ष में एक शिक्षक के रूप में यह समझना आवश्यक है कि यदि भूखा या भयभीत छात्र (निम्न आवश्यकता वाला) कक्षा में है, तो वह सीखने पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकता जब तक उसकी मूल आवश्यकताएं पूरी न हों।