अधिगम के किस सिद्धांत में 'अंतर्दृष्टि' (Insight) और 'सूझ-बूझ' को सीखने का मुख्य आधार माना गया है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम के गेस्टाल्ट सिद्धांत (Gestalt Theory of Learning) के अनुसार, सीखना या अधिगम किसी स्थिति को समग्र रूप में देखने और अचानक से समझ या 'अंतर्दृष्टि' (Insight) प्राप्त होने की प्रक्रिया है। इस सिद्धांत के मुख्य प्रवर्तक मैक्स वर्दीमर (Max Wertheimer), कोहलर (Wolfgang Köhler) और कोफ्का (Kurt Koffka) हैं। कोहलर द्वारा सुल्तान नामक चिम्पाजी पर किए गए प्रसिद्ध प्रयोग में यह साबित किया गया कि प्राणी किसी समस्या का समाधान केवल यांत्रिक प्रयास और त्रुटि से नहीं, बल्कि अपनी बौद्धिक क्षमता और संज्ञानात्मक सूझ-बूझ के माध्यम से अचानक से करता है। जब व्यक्ति समस्या के विभिन्न अंगों के संबंधों को देखकर पूरे परिदृश्य को एक साथ समझ लेता है, तो उसे अंतर्दृष्टि या सूझ कहा जाता है। इसलिए 'अंतर्दृष्टि और सूझ-बूझ' का सीधा संबंध गेस्टाल्टवादी मनोविज्ञान से है जो समग्रता पर जोर देता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- गेस्टाल्ट एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ 'समग्र' (Whole) या 'पूर्ण आकृति' होता है। यह इस बात पर बल देता है कि 'संपूर्ण भाग अपने अंगों के योग से अधिक होता है'।
- विकल्प (a) शास्त्रीय अनुबंधन इवान पावलोव द्वारा प्रतिपादित है जो उद्दीपक और प्रतिक्रिया के बीच साहचर्य पर आधारित है।
- विकल्प (c) प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत ई.एल. थॉर्नडाइक द्वारा दिया गया है, जो यांत्रिक तरीके से बार-बार की गई कोशिशों पर आधारित है, न कि अचानक सूझ पर।
- विकल्प (d) क्रियाप्रसूत अनुबंधन बी.एफ. स्किनर द्वारा दिया गया है जो पुनर्बलन (Reinforcement) और परिणामों पर आधारित होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान संज्ञानात्मक विकास और समस्या समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह रटने की प्रवृत्ति के बजाय समझ आधारित अधिगम की वकालत करता है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम सिद्धांतों और संज्ञानवाद का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS) में अक्सर गेस्टाल्टवादियों (कोहलर, कोफ्का, वर्दीमर) और उनके 'अंतर्दृष्टि सिद्धांत' (Insight Learning Theory) से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। छात्रों को यह समझना चाहिए कि जहाँ थॉर्नडाइक का सिद्धांत क्रमिक और यांत्रिक होता है, वहीं कोहलर का सिद्धांत अचानक मानसिक प्रकाश (Aha! Moment) से जुड़ा होता है। कक्षा कक्ष शिक्षण में शिक्षकों को छात्रों को केवल तथ्य रटाने के बजाय समस्याओं को समग्र रूप में प्रस्तुत करना चाहिए ताकि वे अपनी अंतर्दृष्टि का प्रयोग कर सकें। यह आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) को बढ़ावा देने के लिए ಅತ್ಯन्त उपयोगी विधि है।