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अभिप्रेरणा एवं प्रेरक
Asked 4 महीने पहले · Viewed 3,542 times
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सीखने की प्रक्रिया में 'अभिप्रेरणा' (Motivation) का क्या कार्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) के अंतर्गत 'अभिप्रेरणा' (Motivation) सीखने की प्रक्रिया का एक केंद्रीय और अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह वह आंतरिक या बाह्य बल है जो किसी शिक्षार्थी को किसी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु ऊर्जावान बनाता है, निर्देशित करता है और बनाए रखता है। अभिप्रेरणा विद्यार्थियों के भीतर सीखने की जिज्ञासा, रुचि और उत्साह को जागृत करती है। जब कोई छात्र अभिप्रेरित होता है, तो वह ज्ञान का निष्क्रिय ग्रहणकर्ता न बनकर सक्रिय निर्माता (Active Constructor of Knowledge) बन जाता है। अत: सही विकल्प (b) है, जो सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और आंतरिक ऊर्जा के संचार को स्पष्ट करता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • अभिप्रेरणा दो प्रकार की होती है: आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation) जो संतोष और जिज्ञासा से जुड़ी होती है, और बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic Motivation) जो पुरस्कार या प्रशंसा पर आधारित होती है।
  • विकल्प (a) रटने की आदत को बढ़ावा देता है, जो आधुनिक बाल-केंद्रित शिक्षा (Child-Centric Education) के विरुद्ध है।
  • विकल्प (c) और (d) केवल सतही प्रबंधन से संबंधित हैं, जबकि अभिप्रेरणा सीधे तौर पर संज्ञानात्मक जुड़ाव (Cognitive Engagement) और रुचि से जुड़ी है।
  • अधिगम के पठार (Plateau of Learning) को तोड़ने और छात्रों की एकाग्रता बढ़ाने में अभिप्रेरणा उत्प्रेरक का कार्य करती है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शिक्षा मनोविज्ञान में मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Maslow's Hierarchy of Needs) और स्किनर का अधिगम सिद्धांत इस बात पर बल देते हैं कि अभिप्रेरणा के बिना शिक्षण प्रभावी नहीं हो सकता। अधिक जानकारी के लिए देखें अधिगम प्रक्रिया एवं अभिप्रेरणा।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔

गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, KVS) में अभिप्रेरणा से जुड़े प्रश्न हर बार पूछे जाते हैं। शिक्षकों को कक्षा कक्ष में ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए जहाँ रटने (Rote Learning) को हतोत्साहित किया जाए और वैचारिक समझ (Conceptual Understanding) को बढ़ावा दिया जाए। जब छात्र स्वेच्छा से सीखने में रुचि लेते हैं, तो कक्षा में अनुशासन स्वतः ही स्थापित हो जाता है और बाह्य नियंत्रण की आवश्यकता कम हो जाती है। इसलिए, 'रुचि और उत्साह' उत्पन्न करना ही अभिप्रेरणा का मूल उद्देश्य है।

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