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बाल-केंद्रित एवं सक्रिय शिक्षण
Asked 4 सप्ताह पहले · Viewed 4,108 times
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जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम' (Progressive Education and Experiential Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'करके सीखना' (Learning by Doing)—जिसे उस व्यावहारिक शिक्षा दर्शन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक को निष्क्रिय श्रोता बनाने के बजाय उसके वास्तविक जीवन के अनुभवों, सामाजिक समस्याओं के समाधान और हाथों से कार्य करने (Hands-on activities) के माध्यम से ज्ञान का सक्रिय निर्माता बनाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यावहारिक समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से, जॉन डीवी का 'करके सीखना' (Learning by Doing) और प्रगतिशील शिक्षा का सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि शिक्षा केवल भविष्य की तैयारी नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की प्रक्रिया है। जब छात्र हाथों से कार्य करते हैं, समस्याओं का सामना करते हैं और समूह में मिलकर उनका समाधान निकालते हैं, तो उनका संज्ञानात्मक, सामाजिक और नैतिक विकास वैज्ञानिक तरीके से होता है। विकल्प (b) इस सिद्धांत के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थों और वैज्ञानिकता की सबसे सटीक व्याख्या करता है।
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