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वैयक्तिक भिन्नताएँ
Asked 2 महीने पहले · Viewed 2,543 times
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बाल विकास के सिद्धांतों के अंतर्गत 'विकास की अनवरतता का सिद्धांत' (Principle of Continuity) तथा 'विकास की व्यक्तिगत भिन्नता का सिद्धांत' (Principle of Individual Differences) की तात्विक और वैज्ञानिक गतिकी का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, यदि एक बालक का शारीरिक, मानसिक और संवेगात्मक विकास गर्भधारण से लेकर मृत्युपर्यंत एक विशिष्ट क्रम में निरंतर आगे बढ़ता है, परंतु प्रत्येक बालक में इस विकास की गति और प्रतिमान में भिन्नता पाई जाती है, तो इन दोनों सिद्धांतों के पारस्परिक अंतर्संबंध और व्यापक निहितार्थों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?

विस्तृत व्याख्या एवं समाधान

बाल विकास के सिद्धांतों में 'विकास की अनवरतता का सिद्धांत' यह रेखांकित करता है कि विकास एक सतत (Continuous) प्रक्रिया है जो गर्भधारण से प्रारंभ होकर मृत्युपर्यन्त अविच्छिन्न रूप से चलती रहती है। यद्यपि विकास की गति कभी तीव्र तो कभी मंद हो सकती है, लेकिन यह कभी रुकती नहीं है। इसके साथ ही, 'व्यक्तिगत भिन्नता का सिद्धांत' यह स्पष्ट करता है कि यद्यपि सभी बच्चों में विकास का क्रम (Sequence) लगभग समान होता है (जैसे सिर से पैर की ओर या केंद्र से बाहर की ओर), तथापि प्रत्येक बालक की विकास की दर (Rate of Development) अपनी आनुवंशिक और पर्यावरणीय अंतःक्रिया के कारण भिन्न होती है। विकास से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।

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