गार्डनर बनाम स्पीयरमैन: बुद्धि के सिद्धांत: अंतर और तुलना
स्पीयरमैन ने बुद्धि को एक सामान्य कारक (g) और कई विशिष्ट कारकों (s) से समझाया, जबकि गार्डनर ने कहा कि बुद्धि कोई एक सामान्य क्षमता नहीं बल्कि कई स्वतंत्र बुद्धियों का समूह है।
गार्डनर की बहुबुद्धि और स्पीयरमैन का द्विकारक सिद्धांत में मुख्य अंतर
| आधार | गार्डनर की बहुबुद्धि | स्पीयरमैन का द्विकारक सिद्धांत |
|---|---|---|
| सिद्धांत का नाम | द्विकारक सिद्धांत (two-factor theory)। | बहुबुद्धि का सिद्धांत (multiple intelligences)। |
| वर्ष और स्रोत | 1904 का शोध-पत्र। | Frames of Mind (1983)। |
| बुद्धि का स्वरूप | एक सामान्य कारक g और विशिष्ट कारक s। | कई अलग-अलग, अपेक्षाकृत स्वतंत्र बुद्धियाँ। |
| सामान्य कारक की भूमिका | g सबसे महत्त्वपूर्ण है, सभी मानसिक कार्यों में काम आता है। | कोई एक सामान्य बुद्धि नहीं मानी गई। |
| मापन | IQ और कारक-विश्लेषण जैसी विधियाँ। | पारंपरिक IQ परीक्षण पर्याप्त नहीं, मूल्यांकन के विविध तरीके। |
| उदाहरण | गणित और भाषा दोनों के अंकों में सहसंबंध g के कारण। | कोई छात्र चित्रकला में तेज़ और गणित में सामान्य हो सकता है। |
| शिक्षा के लिए निहितार्थ | सामान्य क्षमता के आधार पर समूह बनाना। | विविध क्षमताओं के लिए विविध शिक्षण गतिविधियाँ। |
दोनों के बीच बहस
स्पीयरमैन का सिद्धांत यह मानकर चलता है कि अलग-अलग मानसिक कार्यों के अंकों में सहसंबंध होता है, इसलिए उनके पीछे कोई साझा क्षमता है। गार्डनर इसे बुद्धि की संकीर्ण समझ मानते हैं। आज भी दोनों दृष्टिकोण शिक्षा में अपनी-अपनी जगह रखते हैं।
परीक्षा के लिए याद रखें
g और s कारक हों तो स्पीयरमैन, सात या आठ बुद्धियाँ हों तो गार्डनर। स्पीयरमैन बुद्धि को एकीकृत मानते हैं, गार्डनर विविध।
अभ्यास प्रश्न
संदर्भ
- चार्ल्स स्पीयरमैन, General Intelligence, Objectively Determined and Measured (1904)
- हॉवर्ड गार्डनर, Frames of Mind (1983)