बुद्धि परीक्षण के लिए 'स्टैनफोर्ड-बिने स्केल' (Stanford-Binet Scale) का संशोधन किसने किया था?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि परीक्षण के इतिहास में 'स्टैनफोर्ड-बिने स्केल' (Stanford-Binet Scale) का संशोधन अमेरिकी मनोवैज्ञानिक लुईस टर्मन (Lewis Terman) द्वारा वर्ष 1916 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किया गया था। मूल रूप से पहला बुद्धि परीक्षण अल्फ्रेड बिने और थियोडोर साइमन द्वारा 1905 में फ्रांस में विकसित किया गया था। चूँकि बिने-साइमन परीक्षण फ्रांसीसी बच्चों के लिए था और अमेरिकी संस्कृति के अनुकूल नहीं था, इसलिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लुईस टर्मन ने इसमें व्यापक संशोधन, मानकीकरण और पुनरुत्पादन किया। इसी संशोधित रूप को 'स्टैनफोर्ड-बिने इंटेलिजेंस स्केल' कहा जाता है। टर्मन ने ही इस परीक्षण में पहली बार 'बुद्धि लब्धि' (IQ - Intelligence Quotient) के कॉन्सेप्ट को विलियम स्टर्न के सूत्र (MA/CA × 100) के साथ बड़े पैमाने पर लागू किया था, जिससे यह मनोवैज्ञानिक आकलन का एक स्वर्ण मानक बन गया।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- अल्फ्रेड बिने (विकल्प a): इन्होंने 1905 में साइमन के साथ मिलकर दुनिया का पहला व्यावहारिक बुद्धि परीक्षण (Binet-Simon Scale) बनाया था, लेकिन स्टैनफोर्ड संशोधन इन्होंने नहीं किया था।
- लुईस टर्मन (विकल्प b - सही उत्तर): स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में बिने के स्केल का अमेरिकी मानकीकरण और संशोधन किया, जिसे स्टैनफोर्ड-बिने स्केल के रूप में जाना जाता है।
- विक्षलर (विकल्प c): डेविड विक्षलर ने वयस्क बच्चों के लिए अलग बुद्धि परीक्षण (WAIS और WISC) विकसित किए, जो शब्दों और क्रियात्मक परीक्षणों का संयोजन हैं।
- स्पीयरमैन (विकल्प d): चार्ल्स स्पीयरमैन ने बुद्धि का द्व-कारक सिद्धांत (Two-Factor Theory - G and S Factor) प्रतिपादित किया था।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बुद्धि परीक्षणों का विकास और मापन बाल विकास मनोविज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है। बुद्धि और उसके परीक्षण के अंतर्गत टर्मन का योगदान अमेरिकी शैक्षिक मनोविज्ञान में मील का पत्थर माना जाता है, जहाँ व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण को मानकीकृत किया गया।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और KVS) में बुद्धि परीक्षण के रचनाकारों, उनके संशोधनों और मनोवैज्ञानिकों के नामों से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। छात्रों को अक्सर अल्फ्रेड बिने और लुईस टर्मन के बीच भ्रम होता है। याद रखें कि बिने ने 'प्रारंभिक परीक्षण' दिया था, जबकि टर्मन ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में उसका 'संशोधन और मानकीकरण' किया था। परीक्षा हॉल में प्रश्न को ध्यान से पढ़ना आवश्यक है कि वह 'मूल निर्माण' के बारे में पूछ रहा है या 'संशोधन' के बारे में। टर्मन के इस संशोधन ने ही विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, प्रतिभाशाली बालकों (Gifted Children) की पहचान और उनके शैक्षणिक नियोजन में क्रांतिकारी बदलाव किए। इस प्रकार के तथ्यात्मक और संकल्पनात्मक प्रश्नों को हल करने से बाल विकास के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर पकड़ मजबूत होती है।