सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (Continuous and Comprehensive Evaluation) क्या है?
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) ऐसी व्यवस्था है जिसमें बच्चे का मूल्यांकन पूरे सत्र में लगातार (सतत) और उसके शैक्षिक तथा सह-शैक्षिक, दोनों पक्षों का (व्यापक) किया जाता है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 29 इसकी बात करती है।
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन: विस्तृत व्याख्या
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन को समझें
सतत का अर्थ है नियमित अंतराल पर, व्यापक का अर्थ है ज्ञान के साथ कौशल, रुचि, मनोवृत्ति और व्यक्तित्व तक। CBSE ने इसे लगभग 2009-10 के सत्र से लागू किया, जिसमें रचनात्मक और योगात्मक मूल्यांकन मिलाकर चलते थे। अलग-अलग राज्यों और कक्षाओं में बाद में इसके स्वरूप में बदलाव होते रहे हैं।
याद रखने योग्य बिंदु
- सतत: लगातार, व्यापक: सभी पक्ष
- RTE अधिनियम 2009 की धारा 29(2)(h)
- रचनात्मक और योगात्मक का संयोजन
उदाहरण
शिक्षक वर्ष भर में कक्षा की गतिविधियाँ, परियोजना, मौखिक प्रश्न और खेलों में भागीदारी भी देखकर बच्चे का आकलन दर्ज करते हैं, केवल एक परीक्षा के अंक नहीं।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
सतत = लगातार, व्यापक = सभी पक्ष। RTE अधिनियम और NCF 2005 के संदर्भ के साथ इसके उद्देश्य, जैसे परीक्षा का तनाव कम करना, पूछे जाते हैं।
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) की धारा 29 के अंतर्गत निर्धारित 'पाठ्यचर्या और मूल्यांकन की…
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संबंधित अवधारणाएँ
- भारत सरकार, निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009
- NCERT, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005